Delhi पुलिस ने मध्य प्रदेश में नकली डॉक्टर बनकर रहने वाले फरारी को 27 साल बाद गिरफ्तार किया
करीब 27 वर्षों तक कानून की नजरों से बचकर मध्य प्रदेश में नकली डॉक्टर बनकर रह रहे एक फरार आरोपी को आखिरकार Delhi पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी न केवल दिल्ली पुलिस की लंबी और धैर्यपूर्ण जांच का परिणाम है, बल्कि उन अपराधियों के लिए भी एक बड़ा संदेश है जो यह मान लेते हैं कि समय बीत जाने के बाद उनके अपराध भुला दिए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि आरोपी पिछले 27 साल से अपनी पहचान बदलकर मध्य प्रदेश के एक शहर में चिकित्सक के रूप में रह रहा था और लोगों का इलाज भी कर रहा था।
Delhi अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ वर्ष 1999 में दिल्ली में गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हुआ था। घटना के बाद वह फरार हो गया और लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। कई वर्षों तक उसके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। समय के साथ उसने अपना नाम और पहचान बदल ली तथा मध्य प्रदेश में जाकर नकली डॉक्टर के रूप में क्लिनिक संचालित करने लगा।
Delhi पुलिस की अपराध शाखा ने हाल के महीनों में पुराने लंबित मामलों की समीक्षा शुरू की थी। इसी दौरान इस मामले की फाइल भी दोबारा खोली गई। आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड, पुराने दस्तावेजों और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश फिर से शुरू की। जांच के दौरान कुछ ऐसे सुराग मिले जिनसे पता चला कि आरोपी मध्य प्रदेश में किसी अन्य नाम से रह रहा है।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम मध्य प्रदेश पहुंची और कई दिनों तक गुप्त निगरानी की। पुलिस ने स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई और पाया कि जिस व्यक्ति पर संदेह किया जा रहा है, वह बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के लोगों का इलाज कर रहा है। उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद पुलिस ने उसकी वास्तविक पहचान की पुष्टि की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने प्रारंभिक तौर पर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उसके सामने रखे तो उसने अपनी असली पहचान स्वीकार कर ली। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया, जहां उससे पुराने मामले और फरारी के दौरान की गतिविधियों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने वर्षों तक लोगों का विश्वास जीतकर एक डॉक्टर की छवि बना ली थी। स्थानीय लोग उसे एक अनुभवी चिकित्सक मानते थे और बड़ी संख्या में मरीज उसके पास इलाज कराने आते थे। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसने मेडिकल प्रैक्टिस के लिए कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए, क्या वे पूरी तरह फर्जी थे और इस दौरान किसी मरीज को गंभीर नुकसान तो नहीं पहुंचा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना वैध डिग्री और लाइसेंस के चिकित्सा करना गंभीर अपराध है। इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियां भी जांच करती हैं और यदि कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर चिकित्सा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई की जाती है।
Delhi पुलिस का कहना है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, यदि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं तो आरोपी को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिस ने कई पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलकर फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आधुनिक तकनीक, आधारभूत डिजिटल रिकॉर्ड, पहचान सत्यापन प्रणाली और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय ने ऐसी कार्रवाई को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया है।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक फरार रहने से किसी आरोपी का अपराध समाप्त नहीं हो जाता। यदि अदालत द्वारा मामला लंबित है और आरोपी फरार घोषित है, तो उसकी गिरफ्तारी किसी भी समय की जा सकती है। ऐसे मामलों में अदालत आरोपी की फरारी की अवधि और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखती है।
इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर निजी क्लीनिकों और चिकित्सकों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना चाहिए ताकि कोई व्यक्ति फर्जी पहचान या नकली डिग्री के आधार पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न कर सके। आम नागरिकों को भी किसी डॉक्टर से इलाज कराने से पहले उसके पंजीकरण और योग्यता की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।
फिलहाल Delhi पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान उसे किसने मदद पहुंचाई, उसने अपनी नई पहचान कैसे बनाई और क्या उसके साथ अन्य लोग भी इस फर्जीवाड़े में शामिल थे। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
27 साल बाद हुई यह गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि कानून की पहुंच से हमेशा के लिए बच पाना संभव नहीं है। चाहे अपराधी कितनी भी सावधानी से अपनी पहचान बदल ले या किसी दूसरे राज्य में नया जीवन शुरू कर दे, जांच एजेंसियां समय आने पर उसे कानून के सामने लाने में सक्षम हैं। साथ ही, यह मामला समाज को भी सतर्क रहने का संदेश देता है कि किसी भी चिकित्सक से इलाज कराने से पहले उसकी योग्यता और पंजीकरण की जांच अवश्य करें, क्योंकि स्वास्थ्य के मामले में छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
Delhi में वोटर सूची का SIR शुरू हुआ; सीएम रेखा गुप्ता ने इसे ‘लोकतंत्र का यज्ञ’
Follow us on Facebook

