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Dharmendra प्रधान ने एनसीईआरटी के पेपर खरीद में कथित चूक पर सख्त कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) में पेपर खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रक्रियागत चूक के मामले को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन से समझौता नहीं किया जा सकता।

Dharmendra प्रधान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून तथा सेवा नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

एनसीईआरटी देश की प्रमुख शैक्षिक संस्था है, जो स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकों का निर्माण और प्रकाशन करती है। हर वर्ष करोड़ों छात्रों तक किताबें पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर कागज (पेपर) की खरीद की जाती है। इसी खरीद प्रक्रिया से जुड़े कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठे हैं।

Dharmendra Pradhan seeks strict action over NCERT's paper procurement lapse

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के पालन, निविदा प्रक्रिया और प्रशासनिक अनुमोदनों को लेकर कुछ आपत्तियां सामने आई हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मंत्री का स्पष्ट संदेश

Dharmendra प्रधान ने कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जांच में किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं होना चाहिए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Dharmendra Pradhan seeks strict action over NCERT's paper procurement lapse

पारदर्शिता पर सरकार का जोर

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर जोर देती रही है। ई-टेंडरिंग, ऑनलाइन निगरानी और वित्तीय नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए कई सुधार लागू किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी संस्था में खरीद प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच न केवल जवाबदेही सुनिश्चित करती है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में भी मदद करती है।

एनसीईआरटी की भूमिका

एनसीईआरटी देशभर के विद्यालयों के लिए पाठ्यपुस्तकों के विकास, पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन और नई पाठ्यपुस्तकों के विकास में भी संस्था की केंद्रीय भूमिका रही है।

ऐसे में संस्था की खरीद प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों को शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों की समय पर छपाई और वितरण के लिए कागज की खरीद प्रक्रिया का व्यवस्थित और पारदर्शी होना आवश्यक है।

जांच की दिशा

सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों से दस्तावेज मांगे गए हैं और खरीद प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की समीक्षा की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, क्या प्रतिस्पर्धी निविदा प्रणाली अपनाई गई थी और क्या खरीद निर्णय निर्धारित नियमों के अनुरूप लिए गए थे।

यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक होने पर अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीईआरटी जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनकी कार्यप्रणाली का सीधा प्रभाव देश के करोड़ों विद्यार्थियों पर पड़ता है। पाठ्यपुस्तकों की छपाई और वितरण में किसी भी प्रकार की देरी छात्रों और स्कूलों के लिए कठिनाइयां पैदा कर सकती है।

इसलिए खरीद प्रक्रिया में दक्षता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक है जितना वित्तीय अनुशासन बनाए रखना।

जवाबदेही की आवश्यकता

शासन और प्रशासन के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इससे एक ओर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित होती है, वहीं दूसरी ओर यदि आरोप निराधार हों तो संबंधित अधिकारियों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाती है।

सरकार का कहना है कि वह शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और सुशासन के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक संस्थानों में जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खरीद प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं, तथा जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।

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