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SC/ST एक्ट में FIR के बाद Influencer अजीत भारती का पलटवार, चंद्रशेखर आजाद पर टिप्पणी को लेकर विवाद तेज

यूट्यूबर और सोशल मीडिया कमेंटेटर Influencer अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बाद विवाद और तेज हो गया है। मामला नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर कथित आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणियों से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने 24 अगस्त 2026 को सामने आए मामले में शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामले की जड़ 22 अगस्त को प्रसारित Influencer अजीत भारती के एक वीडियो को बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान चंद्रशेखर आजाद और डॉ. आंबेडकर से संबंधित टिप्पणियां की गईं। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि इन टिप्पणियों में अनुसूचित जाति समुदाय के प्रति अपमानजनक और जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल हुआ। इसी आधार पर दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू थाने में शिकायत दी गई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई।

शिकायत आजाद समाज पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रदेश अध्यक्ष बालाक्रम बौद्ध की ओर से किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब वीडियो और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जांच में वीडियो की फॉरेंसिक पड़ताल भी शामिल है।

Influencer Ajeet Bharti hits back after SC/ST Act FIR over Chandrashekhar Azad remarks

Influencer अजीत भारती ने क्या कहा?

एफआईआर दर्ज होने के बाद अजीत भारती ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि उनकी प्रतिक्रिया एक ऐसी टिप्पणी के जवाब में थी जिसमें उनकी मां और बहन को लेकर आपत्तिजनक बात कही गई थी। भारती ने कहा कि उन्होंने चंद्रशेखर आजाद को लेकर कोई जातिसूचक शब्द इस्तेमाल नहीं किया।

उन्होंने अपने बयान में सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति की मां या बहन को लेकर इस तरह की टिप्पणी की जाए तो क्या वह चुप रह सकता है। भारती ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर उकसाया गया था। उनके अनुसार, विवादित टिप्पणी को उसके पूरे संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है।

इस तरह Influencer भारती ने एफआईआर को अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि मानने के बजाय इसे अपनी प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति के संदर्भ में देखने की मांग की है। हालांकि, उनके बयान और वीडियो की कानूनी व्याख्या जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

FIR में क्या आरोप हैं?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने भारती के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया है। शिकायत में अनुसूचित जाति समुदाय, चंद्रशेखर आजाद और डॉ. आंबेडकर के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है।

एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोपों के सिद्ध होने के बराबर नहीं है। पुलिस जांच के दौरान वीडियो, उसके संदर्भ, कथित टिप्पणियों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी। इसके बाद ही मामले की आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।

Influencer Ajeet Bharti hits back after SC/ST Act FIR over Chandrashekhar Azad remarks

आरक्षण विरोधी आंदोलन से भी जुड़ा मामला

अजीत भारती हाल के दिनों में आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन से जुड़े एक चर्चित चेहरे के रूप में सामने आए हैं। 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण को लेकर प्रदर्शन भी हुआ था। इसके अगले दिन प्रसारित वीडियो और उसके बाद दर्ज एफआईआर ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

आरक्षण का मुद्दा पहले से ही देश में संवेदनशील राजनीतिक विषय रहा है। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था के विरोध, जाति आधारित राजनीति और सोशल मीडिया पर नेताओं के खिलाफ टिप्पणियों का आपस में जुड़ना विवाद को और व्यापक बना रहा है।

चंद्रशेखर आजाद की राजनीति भी चर्चा में

चंद्रशेखर आजाद दलित राजनीति में एक प्रमुख युवा चेहरे के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं और नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वह आजाद समाज पार्टी के प्रमुख भी हैं। उनके समर्थकों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि किसी राजनीतिक नेता की आलोचना और जाति के आधार पर अपमान के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।

दूसरी ओर, भारती के समर्थक इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक प्रतिक्रिया के सवाल से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की टिप्पणी के जवाब में दिए गए बयान का पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।

कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच बहस

यह विवाद एक बार फिर यह सवाल सामने लाता है कि राजनीतिक आलोचना की सीमा कहां समाप्त होती है और जातिगत अपमान या कानून के तहत दंडनीय टिप्पणी की शुरुआत कहां से होती है। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं और सार्वजनिक व्यक्तियों पर तीखी टिप्पणियां तेजी से वायरल होती हैं। ऐसे में बयान का संदर्भ, भाषा, उद्देश्य और उसके संभावित प्रभाव महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बन जाते हैं।

हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले में कहा था कि आरोपों के आधार पर प्रथमदृष्टया मामला बनता है या नहीं, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया में देखा जाता है। एक अन्य मामले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कथित जातिसूचक शब्द का उल्लेख पर्याप्त नहीं हो सकता; मामले की परिस्थितियां और कथित मंशा भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, उन मामलों के तथ्य अलग हैं और उन्हें अजीत भारती के मामले पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

आगे क्या होगा?

अब इस विवाद में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसियां कथित वीडियो की वास्तविक सामग्री, उसके संदर्भ, शिकायत में लगाए गए आरोप और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण करेंगी। यदि मामला आगे बढ़ता है तो अदालत यह तय करेगी कि आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की क्या स्थिति बनती है।

फिलहाल अजीत भारती ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए पलटवार किया है और कहा है कि उनकी टिप्पणी को उस संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसमें उन्होंने उसे दिया था। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि उनके बयान ने अनुसूचित जाति समुदाय और चंद्रशेखर आजाद के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

इस पूरे प्रकरण ने आरक्षण, जातिगत पहचान, राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया की भाषा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मामला अभी जांच के स्तर पर है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि एफआईआर के बाद अजीत भारती का पलटवार विवाद को शांत करने के बजाय इसे राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बना चुका है।

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