Ram मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन की FIR की मांग, आंदोलन की चेतावनी
अयोध्या, 24 अगस्त 2026: अयोध्या के Ram मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मंदिर से जुड़े अधिकारी गोपाल राव के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग दोहराई है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो वकील दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। यह फैसला 22 अगस्त को बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में लिया गया।
बार एसोसिएशन ने फिर उठाई FIR की मांग
फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में वकीलों ने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए धन और आभूषणों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है। एसोसिएशन का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ उसने शिकायत दी है, उनके खिलाफ अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है।
बैठक के बाद बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर से मिला और मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की। वकीलों ने कहा कि उनकी शिकायत पर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
जुलाई में भी हुआ था विरोध प्रदर्शन
यह पहली बार नहीं है जब फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इस मामले को लेकर विरोध दर्ज कराया है। 2 जुलाई को बड़ी संख्या में वकीलों ने अयोध्या में प्रदर्शन मार्च निकाला था। वे अदालत परिसर से राम जन्मभूमि थाने तक पहुंचे और वहां लिखित शिकायत देकर चंपत राय, अनिल मिश्रा तथा गोपाल राव के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। शिकायत में एक अन्य ट्रस्टी कृष्ण मोहन का नाम भी आरोपी के रूप में शामिल किए जाने की बात सामने आई थी।
वकीलों ने उस समय भी कहा था कि श्रद्धालुओं के दान और मंदिर में चढ़ाए जाने वाले कीमती सामान की कथित चोरी ने उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। बार एसोसिएशन ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा था कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
बार एसोसिएशन की शिकायत में मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद धन और आभूषणों की कथित हेराफेरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, बड़ी मात्रा में दान राशि और कीमती वस्तुओं के गायब होने तथा कथित तौर पर वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने के प्रयासों की जांच होनी चाहिए। हालांकि, ये आरोप अभी आरोप ही हैं और किसी अदालत द्वारा संबंधित व्यक्तियों को दोषी ठहराया नहीं गया है।
जुलाई में पुलिस के सामने शिकायत देने के बाद यह मामला और राजनीतिक तथा सामाजिक रूप से संवेदनशील हो गया था। पुलिस की ओर से चंपत राय को मामले में एक महत्वपूर्ण गवाह के तौर पर देखे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। दूसरी ओर, राय ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और दावा किया है कि उन्होंने ही कथित वित्तीय अनियमितताओं को सामने लाने में भूमिका निभाई थी।
वकीलों ने पैरवी से भी किया था इनकार
फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इससे पहले मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कानूनी पैरवी नहीं करने का सामूहिक फैसला भी लिया था। जून में एसोसिएशन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने के लिए तीन दिन का समय देने और ऐसा न करने पर व्यापक विरोध की चेतावनी दी थी। उस समय वकीलों ने कथित चढ़ावा घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग भी उठाई थी।
बाद में एसोसिएशन ने स्पष्ट रुख अपनाया कि उसके सदस्य इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेंगे। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस फैसले का उल्लंघन करने वाले सदस्यों पर आर्थिक दंड लगाने का निर्णय भी लिया गया था।
अब फिर आंदोलन की चेतावनी
22 अगस्त की बैठक के बाद बार एसोसिएशन ने कहा कि अगर चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होती है, तो वकील नए सिरे से आंदोलन करेंगे। एसोसिएशन का आरोप है कि प्रशासन और सरकार इन लोगों को कथित तौर पर संरक्षण दे रहे हैं और उन्हें क्लीन चिट देने की कोशिश की जा रही है।
यह आरोप ऐसे समय सामने आया है जब मामले की जांच को लेकर पहले से ही अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को राहत मिलने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, SIT ने दोनों के खिलाफ गड़बड़ी का पर्याप्त आधार नहीं पाया। ऐसे में बार एसोसिएशन की FIR की मांग और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के बीच मतभेद स्पष्ट दिखाई देता है।
राम मंदिर से जुड़ा दान और चढ़ावा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। इसलिए मंदिर में जमा धन या कीमती वस्तुओं के कथित दुरुपयोग का आरोप केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं रह जाता, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक और धार्मिक प्रभाव भी पड़ता है।
फैजाबाद बार एसोसिएशन का कहना है कि इस मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके पद या प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। दूसरी ओर, जिन लोगों के नाम शिकायत में हैं, उनके खिलाफ आरोपों को अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए FIR, स्वतंत्र जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पर बार एसोसिएशन की मांग को लेकर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। वकीलों की नई आंदोलन की चेतावनी से अयोध्या में यह विवाद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और क्या कोई नई FIR दर्ज होती है, यही इस विवाद की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।

