Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने पर केजरीवाल का बड़ा बयान, बोले- आगे उम्मीदवार चुनने से पहले 100 बार करेंगे जांच

नई दिल्ली/पणजी: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने के बाद पहली बार इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान केजरीवाल ने कहा कि इस घटनाक्रम से पार्टी ने एक बड़ा सबक सीखा है और भविष्य में राज्यसभा के लिए किसी भी व्यक्ति को चुनने से पहले उसकी विश्वसनीयता और राजनीतिक प्रतिबद्धता की बेहद गहन जांच की जाएगी। उन्होंने यहां तक कहा कि आगे किसी को राज्यसभा भेजने से पहले उसे “100 बार ठोक-बजाकर” देखा जाएगा।

Arvind Kejriwal की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब AAP को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अप्रैल 2026 में पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से सात सांसद BJP में शामिल हो गए थे। इस घटनाक्रम के बाद उच्च सदन में AAP की संख्या घटकर केवल तीन रह गई।

सात सांसदों के जाने से AAP को बड़ा झटका

AAP से BJP में जाने वाले सात सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। इनमें छह सांसद पंजाब से और एक दिल्ली से राज्यसभा पहुंचे थे। इन सांसदों ने दावा किया था कि सात सांसद AAP के राज्यसभा दल का दो-तिहाई हिस्सा हैं, इसलिए उनका BJP में विलय संविधान की संबंधित व्यवस्था के तहत वैध है।

27 अप्रैल 2026 को राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सातों सांसदों के BJP में विलय को स्वीकार कर लिया। इसके बाद राज्यसभा में AAP की ताकत 10 से घटकर तीन रह गई, जबकि BJP की संख्या बढ़कर 113 हो गई।

AAP की ओर से इस विलय का विरोध भी किया गया था। पार्टी ने सातों सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की और दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की बात कही। पार्टी ने यह भी संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर वह इस मामले को अदालत तक ले जाएगी।

राघव चड्ढा समेत कई करीबी नेताओं के जाने से सवाल

सात सांसदों के BJP में जाने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेताओं की रही। दोनों को AAP नेतृत्व के करीबी और पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं के रूप में देखा जाता था। इसलिए उनके पार्टी छोड़ने को केजरीवाल के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना गया।

केजरीवाल ने अपने ताजा बयान में किसी एक नेता का नाम लेकर हमला नहीं किया, लेकिन उनका संदेश साफ तौर पर पार्टी के भविष्य के राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि पार्टी इस अनुभव से सीख लेगी और आगे उम्मीदवारों की निष्ठा, विचारधारा और भरोसेमंद होने की क्षमता को पहले से ज्यादा गंभीरता से परखेगी।

Arvind Kejriwal says AAP will ‘vet’ future Rajya Sabha picks after seven MPs join BJP

“100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे” का क्या मतलब?

Arvind Kejriwal की टिप्पणी का राजनीतिक अर्थ काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा सांसदों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता। इन्हें संबंधित राज्यों के निर्वाचित विधायक चुनते हैं। ऐसे में किसी राजनीतिक दल के लिए राज्यसभा उम्मीदवार का चयन केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता का सवाल नहीं होता, बल्कि पार्टी के प्रति दीर्घकालिक राजनीतिक प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण होती है।

AAP के सामने अब चुनौती यह है कि भविष्य में राज्यसभा के लिए ऐसे चेहरों का चयन कैसे किया जाए जो पार्टी के साथ लंबे समय तक बने रहें। सात सांसदों के एक साथ BJP में चले जाने के बाद पार्टी नेतृत्व को उम्मीदवार चयन की अपनी पुरानी प्रक्रिया पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

केजरीवाल का “100 बार जांच” वाला बयान इसी ओर इशारा करता है कि आने वाले समय में राज्यसभा उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि, राजनीतिक विचारधारा और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता की ज्यादा सख्त जांच की जा सकती है।

BJP के लिए राजनीतिक बढ़त

सात AAP सांसदों के BJP में शामिल होने से BJP को राज्यसभा में सीधा संख्यात्मक लाभ मिला। इससे पार्टी की उच्च सदन में स्थिति और मजबूत हुई। खासकर पंजाब से जुड़े इन सांसदों के BJP में जाने को अगले विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। N

AAP के लिए मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पंजाब फिलहाल पार्टी का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार है। पार्टी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है और इसी दौरान राज्यसभा में उसके सात सांसदों का चले जाना संगठन और नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी करता है।

Arvind Kejriwal says AAP will ‘vet’ future Rajya Sabha picks after seven MPs join BJP

अब AAP की रणनीति पर नजर

इस घटनाक्रम के बाद AAP के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे राज्यसभा में अपनी सीमित संख्या के साथ राष्ट्रीय राजनीति में अपनी आवाज मजबूत रखनी होगी, वहीं दूसरी तरफ पंजाब में पार्टी के संगठन को एकजुट रखना होगा।

Arvind Kejriwal ने संकेत दिया है कि पार्टी इस पूरे प्रकरण को केवल राजनीतिक नुकसान के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे भविष्य के लिए सबक के तौर पर भी ले रही है। उनके अनुसार, पार्टी में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को और मजबूत करना जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह का सामूहिक पलायन दोबारा न हो

फिलहाल राज्यसभा में AAP के पास तीन सांसद—संजय सिंह, एन. डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल—बचे हैं।

कुल मिलाकर, सात सांसदों का BJP में जाना AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका जरूर है, लेकिन केजरीवाल के ताजा बयान से यह भी साफ है कि पार्टी अब इस घटनाक्रम को संगठनात्मक सुधार के अवसर के रूप में पेश करना चाहती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में कौन-से नए मानदंड अपनाती है और क्या इससे पार्टी में नेताओं की दीर्घकालिक निष्ठा सुनिश्चित हो पाती है

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