Ankita Bhandari

Ankita Bhandari हत्याकांड: दोषियों को उम्रकैद के बाद धामी सरकार ने गिनाए कदम, परिवार को 25 लाख की सहायता और नौकरी

देहरादून: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मामले में उठाए गए कदमों का ब्योरा सार्वजनिक किया है। सरकार ने त्वरित गिरफ्तारी, विशेष जांच दल (SIT) का गठन, मजबूत अभियोजन, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने जैसे कदमों को अपनी कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा बताया है।

हालांकि, मामले में कथित ‘VIP’ की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों और अंकिता के माता-पिता की न्याय संबंधी मांगों के कारण यह प्रकरण एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में है।

24 घंटे के भीतर हुई आरोपियों की गिरफ्तारी

Ankita Bhandari ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या की घटना सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था। मामले ने महिलाओं की सुरक्षा, प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही और पुलिस जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

राज्य सरकार के अनुसार, घटना का खुलासा होने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और तीनों आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

Ankita Bhandari Murder Case: Dhami Government Reveals Actions After Convicts Get Life Term

इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आरोपी बनाया गया था। पुलकित आर्य पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। इस वजह से मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया था।

जांच के लिए गठित की गई SIT

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक, महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में गठित इस टीम ने डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। इसके अतिरिक्त आरोपियों से पूछताछ की गई, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और फॉरेंसिक रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच 88 दिनों में पूरी कर ली गई और अदालत में लगभग 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया। पुलिस ने इस प्रक्रिया को मामले में प्रभावी कानूनी कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

सरकार ने यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा

इस मामले में कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

15 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने मामले की जांच और न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी जानकारी साझा की। पुलिस ने बताया कि त्वरित गिरफ्तारी, विस्तृत जांच और अभियोजन की पैरवी के बाद तीनों दोषियों को सजा मिली।

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राज्य सरकार ने इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई का परिणाम बताया है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोषसिद्धि और सजा अदालत के फैसले पर आधारित हैं, जबकि जांच और अभियोजन में सरकार तथा पुलिस की भूमिका अलग-अलग है।

परिवार की मांग पर बदले गए सरकारी वकील

सरकार के मुताबिक, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अंकिता के परिवार की मांगों को भी ध्यान में रखा गया। परिजनों की इच्छा के अनुरूप सरकारी वकीलों में बदलाव किए गए, ताकि परिवार को न्यायिक प्रक्रिया में अपनी बात रखने का अवसर मिल सके।

अंकिता के माता-पिता लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और सभी संबंधित सवालों के जवाब की मांग करते रहे हैं। सरकार ने कहा कि परिवार की भावनाओं और मांगों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए।

परिवार को 25 लाख रुपये और रोजगार

अंकिता की हत्या के बाद उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। राज्य सरकार के अनुसार, परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त परिवार के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने के कदम भी उठाए गए।

सरकार ने इन प्रयासों को पीड़ित परिवार को सहारा देने और उनके साथ खड़े रहने की पहल बताया है। हालांकि, आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने जैसे कदम न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच से जुड़े सवालों का विकल्प नहीं हैं। परिवार की न्याय संबंधी मांगों और मामले से जुड़े अन्य प्रश्नों का समाधान कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होना आवश्यक है।

CBI जांच और ‘VIP’ विवाद फिर चर्चा में

अंकिता भंडारी मामले में कथित ‘VIP’ की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसी मुद्दे पर अंकिता के माता-पिता ने हाल में दिल्ली के इंडिया गेट के पास प्रदर्शन भी किया। इस विवाद ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता की मांग के बाद मामले की CBI जांच की सिफारिश करने की घोषणा की थी। इस कदम को परिवार की मांगों के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया गया।

हालांकि, CBI जांच की सिफारिश और जांच के वास्तविक दायरे या निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है। कथित VIP से संबंधित सवालों पर किसी निष्कर्ष को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करने से पहले आधिकारिक जांच की जानकारी और उपलब्ध प्रमाणों की पुष्टि आवश्यक है।

निष्कर्ष

अंकिता भंडारी हत्याकांड में धामी सरकार ने त्वरित गिरफ्तारी, SIT जांच, आरोपपत्र, अभियोजन, दोषियों को सजा, परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार जैसे कदमों का हवाला दिया है। तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना मामले की न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

इसके बावजूद, परिवार की संतुष्टि, कथित VIP से जुड़े सवालों और जांच की पारदर्शिता को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है। इस संवेदनशील मामले में जरूरी है कि सरकारी दावों, परिवार की मांगों और जांच से सामने आने वाले तथ्यों को अलग-अलग समझा जाए। अंकिता को न्याय दिलाने के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी इस प्रकरण से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।

 

 

 

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