Nana Patekar Prayer Meet: फिल्म इंडस्ट्री ने दिवंगत अभिनेता को दी श्रद्धांजलि, शिवाजी साटम और रोहिणी हट्टंगडी समेत कई हस्तियां हुईं शामिल
मुंबई, 15 अक्टूबर 2026: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए मुंबई में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इस भावुक कार्यक्रम में फिल्म और रंगमंच जगत की कई हस्तियों ने हिस्सा लिया और दिवंगत अभिनेता के व्यक्तित्व, अभिनय तथा सामाजिक कार्यों को याद किया। 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में नाना पाटेकर के निधन के बाद से ही फिल्म जगत में शोक का माहौल है।
‘आठवणीतील नाना’ (आठवणों में नाना) नाम से आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अभिनेता शिवाजी साटम, रोहिणी हट्टंगडी, वर्षा उसगांवकर, फिल्म निर्देशक संजय जाधव, निर्देशक मेहुल कुमार और महाराष्ट्र के FDA आयुक्त तथा IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे सहित कई लोग मौजूद रहे। महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग और महाराष्ट्र फिल्म, स्टेज एवं सांस्कृतिक विकास निगम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में नाना पाटेकर के जीवन और योगदान को याद किया गया।
Nana Patekar मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी.एल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में हुई इस सभा में उपस्थित लोगों ने नाना पाटेकर को केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्तित्व के रूप में याद किया। कार्यक्रम के दौरान उनके साथ बिताए गए पलों और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किए गए उनके प्रयासों का भी उल्लेख हुआ।
तुकाराम मुंढे हुए भावुक, याद की आखिरी बातचीत
प्रार्थना सभा के सबसे भावुक क्षणों में महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे का संबोधन रहा। नाना पाटेकर के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध थे। उन्हें याद करते हुए मुंढे भावुक हो गए और अभिनेता के संवेदनशील स्वभाव तथा समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का जिक्र किया।
Nana Patekar मुंढे ने नाना पाटेकर के साथ अपनी आखिरी बातचीत को याद करते हुए उनके स्नेहपूर्ण शब्दों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नाना का लोगों से जुड़ने का तरीका बेहद आत्मीय था। उनका व्यक्तित्व केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि वे अपने आसपास के लोगों की परेशानियों को समझने और उनकी मदद करने में भी रुचि रखते थे।
मुंढे के अनुसार, नाना पाटेकर जरूरतमंद लोगों के लिए क्या किया जा सकता है, इस बारे में लगातार सोचते रहते थे। उनकी संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलू थे। इस याद ने सभा में मौजूद लोगों को अभिनेता के उस पक्ष से फिर परिचित कराया, जो अक्सर पर्दे के पीछे रहता था।
शिवाजी साटम ने साझा किया नाना पाटेकर की दरियादिली का किस्सा
प्रार्थना सभा में अभिनेता शिवाजी साटम ने नाना पाटेकर से जुड़ी एक ऐसी घटना साझा की, जिसने उनके मानवीय स्वभाव को उजागर किया। टेलीविजन धारावाहिक CID में एसीपी प्रद्युमन की भूमिका से लोकप्रिय हुए शिवाजी साटम ने बताया कि जब उनकी पत्नी कैंसर से जूझ रही थीं, तब नाना पाटेकर ने कठिन समय में उनकी मदद की थी।
दोनों कलाकार फिल्म घुलाम-ए-मुस्तफा की शूटिंग के दौरान साथ काम कर रहे थे। साटम की निजी परिस्थितियों को समझते हुए नाना ने शूटिंग के कार्यक्रम में बदलाव करने में मदद की, ताकि वह अपनी बीमार पत्नी के साथ अधिक समय बिता सकें।
साटम के अनुसार, नाना ने यह सहायता बिना किसी प्रचार या प्रशंसा की अपेक्षा के की थी। इस घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि अभिनेता की दरियादिली उनके व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा थी। यह किस्सा दिखाता है कि नाना पाटेकर के लिए दूसरों की मुश्किलों को समझना और उनके काम आना कितना महत्वपूर्ण था।
वर्षा उसगांवकर और रोहिणी हट्टंगडी ने भी दी श्रद्धांजलि
अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर और रोहिणी हट्टंगडी भी नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। दोनों ने उनके साथ काम करने और उनके अभिनय को करीब से देखने के अनुभवों को याद किया।
नाना पाटेकर हिंदी और मराठी फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय के लिए पहचाने जाते थे। उनकी खासियत यह थी कि वह अपने किरदारों को केवल संवादों के माध्यम से नहीं, बल्कि चेहरे के भाव, आवाज के उतार-चढ़ाव और स्वाभाविक अभिनय से भी प्रभावशाली बना देते थे।
फिल्म निर्देशक संजय जाधव और मेहुल कुमार सहित अन्य उपस्थित लोगों ने भी भारतीय सिनेमा और रंगमंच में उनके योगदान को याद किया। सभा ने एक ऐसे कलाकार के जीवन को सम्मान दिया, जिसने कई दशकों तक अलग-अलग तरह के किरदारों के माध्यम से दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी।
अभिनय के साथ सामाजिक कार्यों में भी रहा योगदान
Nana Patekar का जीवन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। वह किसानों और ग्रामीण समुदायों की समस्याओं को लेकर भी सक्रिय रहे। वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की स्थापना की थी। इस संस्था का उद्देश्य सूखा प्रभावित किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में संकट का सामना कर रहे परिवारों की सहायता करना रहा है।
उनकी सामाजिक गतिविधियों ने उन्हें उन लोगों के करीब पहुंचाया, जिनकी समस्याएं अक्सर मुख्यधारा की चर्चाओं में पीछे छूट जाती हैं। प्रार्थना सभा में भी उनके इसी पक्ष को विशेष रूप से याद किया गया।
Nana Patekar की अभिनय यात्रा में हिंदी सिनेमा के साथ मराठी रंगमंच और फिल्मों का महत्वपूर्ण स्थान रहा। परिंदा, क्रांतिवीर और तिरंगा जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। उनकी भूमिकाओं में तीव्रता, भावनात्मक गहराई और यथार्थवादी प्रस्तुति देखने को मिलती थी।
नाना पाटेकर की विरासत रहेगी याद
मुंबई में आयोजित यह प्रार्थना सभा नाना पाटेकर को याद करने और उनके जीवन से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर बनी। यहां मौजूद लोगों की यादों से स्पष्ट हुआ कि उनके व्यक्तित्व के कई पहलू थे—एक प्रभावशाली अभिनेता, रंगमंच से गहरा जुड़ाव रखने वाला कलाकार और जरूरतमंदों की सहायता करने वाला सामाजिक कार्यकर्ता।
उनके निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक अनुभवी कलाकार को खो दिया है। हालांकि, उनके निभाए किरदार, अभिनय की विशिष्ट शैली और सामाजिक कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
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