CM उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस तंत्र के लिए सख्त जवाबदेही तय की है।
हालिया ‘जनता दर्शन’ और महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की ढिलाई या झूठी रिपोर्टिंग को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal Mechanism) का दुरुपयोग करने वाले असामाजिक तत्वों और दुर्भावनापूर्ण नीयत से झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के खिलाफ भी कड़े कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है।
अधिकारियों की जवाबदेही: ‘लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई’
CM मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस आयुक्तों, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि थाना, चौकी और बीट स्तर पर किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाए।
जांच में फर्जीवाड़ा रोकने के निर्देश: मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी द्वारा झूठी रिपोर्ट लगाई जाती है, तो उसके खिलाफ तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान: जनशिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय मामले की जमीनी सच्चाई जानकर ही निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
ताकत और मर्यादा का संतुलन: लोकायुक्त संगठन के कार्यक्रम में रामचरितमानस की पंक्ति “प्रभुता पाई काहि मद नाही” का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि लोक सेवकों को मिली शक्तियां जनता की सेवा के लिए हैं। पद के अहंकार में स्वेच्छाचारी व्यवहार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
झूठी और आधारहीन शिकायतों पर शिकंजा
प्रशासनिक तंत्र को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिकायत निवारण व्यवस्था (जैसे IGRS, सीएम हेल्पलाइन और जनता दर्शन) का दुरुपयोग रोकने की जरूरत है।
समय और संसाधनों की बर्बादी: झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतें न केवल सरकारी तंत्र का समय खराब करती हैं, बल्कि असली पीड़ितों के न्याय में भी देरी का कारण बनती हैं।
मेरिट के आधार पर न्याय: सीएम ने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण जाति, मत या संप्रदाय के आधार पर नहीं, बल्कि केवल केस की गुणवत्ता (मेरिट) और तथ्यों के आधार पर होगा।
दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ चेतावनी: जो लोग व्यक्तिगत रंजिश या दुर्भावना से किसी निर्दोष को फंसाने के लिए गलत जानकारी दर्ज कराते हैं, उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
डिजिटल गवर्नेंस और भू-माफिया पर नकेल
CM ने सुशासन स्थापित करने के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष बल दिया है।
पारदर्शी वितरण प्रणाली: राज्य की 80 हजार उचित दर दुकानों को ई-पॉस (e-PoS) मशीनों से जोड़ने के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ी शिकायतों में भारी कमी आई है।
लंबित राजस्व मामलों का निस्तारण: पिछले साढ़े नौ वर्षों में नामांतरण, वरासत और पैमाइश से जुड़े 34 लाख से अधिक लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण किया गया है।
भू-माफिया के खिलाफ सख्त कदम: सरकारी या निजी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले भू-माफियाओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनता के विश्वास की बहाली
CM योगी आदित्यनाथ का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत जनता का अटूट विश्वास है। जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को यह भरोसा होता है कि उसकी समस्या का समाधान निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से होगा, तभी संवैधानिक संस्थाओं की सार्थकता सिद्ध होती है।
सख्त जवाबदेही और झूठी शिकायतों पर दोहरे प्रहार की यह नीति उत्तर प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ गवर्नेंस को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।
जनशिकायतों के गलत निस्तारण पर सीएम योगी की सख्त चेतावनी
यह वीडियो जनशिकायतों की समीक्षा के दौरान गलत रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों और 5 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगने के आदेश को विस्तार से समझाता है।

