Tripura के मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: UCC लागू करने को तैयार, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों को छूट की शर्त
Tripura के मुख्यमंत्री डॉ. मानिक साहा ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि त्रिपुरा सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए UCC लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों और जनजातीय अधिकारों का सम्मान करने की बात कही है।
केंद्रीय निर्देशों का इंतजार और जनजातीय इलाकों के लिए शर्त
Tripura मुख्यमंत्री डॉ. मानिक साहा का यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के एनडीए शासित राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।
प्रेस वार्ता में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
“अगर केंद्र सरकार इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी करती है, तो हम निश्चित रूप से त्रिपुरा में UCC लागू करेंगे। हालांकि, जहां तक मुझे जानकारी है, राज्य के जनजातीय (ट्राइबल) क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है।”
Tripura में आदिवासी आबादी एक बड़ा हिस्सा है और त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत आने वाले इलाकों में विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकार और गोद लेने जैसी प्रथाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों और प्रथागत कानूनों (Customary Laws) से संचालित होती हैं। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि UCC लागू करते समय जनजातीय समाज की इन विशिष्ट परंपराओं को छूट मिलने की पूरी संभावना है ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान पर कोई प्रभाव न पड़े।
पूर्वोत्तर में UCC और जनजातीय अधिकार की चुनौती
पूर्वोत्तर भारत में समान नागरिक संहिता की चर्चा हमेशा से संवेदनशील रही है। संविधान की छठी अनुसूची के तहत त्रिपुरा, मेघालय, असम और मिजोरम जैसे राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों को विशेष स्वायत्तता और सांस्कृतिक संरक्षण मिला हुआ है।
परंपरागत प्रथाएं: आदिवासियों के रीति-रिवाज, शादी-विवाह और संपत्ति के अधिकार सामान्य कानूनों से अलग होते हैं।
उत्तराखंड मॉडल का संदर्भ: इससे पहले उत्तराखंड ने जब अपना UCC कानून पास किया था, तब उसमें भी अनुसूचित जनजातियों (ST) को कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।
त्रिपुरा का रुख: त्रिपुरा सरकार का मानना है कि केंद्र सरकार यदि पूरे देश या राज्य स्तर पर UCC का मसौदा लाती है, तो पूर्वोत्तर के ट्राइबल बेल्ट की स्वायत्तता का ध्यान रखा जाएगा।
सियासी व प्रशासनिक हलचल
Tripura में यह मुद्दा इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में TTAADC की ग्राम समितियों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे समय में आदिवासी समुदाय की चिंताओं को शांत करना सरकार के लिए बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री मानिक साहा के इस बयान से साफ है कि भाजपा सरकार एक तरफ जहां अपने राष्ट्रीय एजेंडे (UCC) को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं स्थानीय स्तर पर आदिवासी वोटों और उनकी चिंताओं को भी साधने का प्रयास कर रही है।

